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मैं हेलमेट क्यों पहनूं !

मैं हेलमेट क्यों पहनूं !

wear helmet

 

मैं हेलमेट क्यों पहनूं !

 

  • हेलमेट मेरे लिए नहीं है। इससे भला मुझे क्या लाभ?
  • ज़रा सी दूर जाने के लिए क्यूँ चाहिए?
  • अरे हमारे यहाँ कोई नहीं पहनता!!
  • हेलमेट से क्या मैं अमर हो जाऊँगा?
  • भैया आगे नहीं पीछे बेठा था।
  • औरतों और बच्चो को कहाँ पहनना होता है?
  • सड़कों की हालत इतनी ख़राब है, इसमें हेलमेट क्या बचाएगा?
  • बालों का स्टाइल ख़राब करना है क्या?
  • हमारे धर्म में मना है।

 

और भी ना जाने कितने बहाने है हेलमेट ना पहनने के।

 

हमें आग से दूर रहने के लिए किसी को कहना नहीं पड़ता, ना ही किसी को हमें रोकना पड़ता है बिजली क़ी  तार छूने से।

ठंड में गरम कपड़े भी हम ख़ुद से इस्तेमाल करते है, चाकू की धार ना छूने के लिए भी भला किसी को कहना पड़ेगा?

क्रिकेट खेलते समय हेलमेट पहन लेंगे मगर बाइक चलाते समय-‘ हेलमेटकभी नहीं

 

ज़रा एक मिनट ध्यान से पढ़िये

 

  • सभी ऐक्सिडेंट्स में 35% bikes (दोपहिया ) चालक चोटिल होते है।*
  • सिर्फ़ बिना हेलमेट के तक़रीबन 100 लोग रोज़ अपनी जान गँवाते है।मतलब हर घंटे 4 लोग।
  • इनमे 45% लोग पीछे बैठने वाले है।
  • हेलमेट से जान बचने की सम्भावना 42% बढ़ जाती है

 

1000 जिंदगियों का जाना केवल एक आँकड़ा हो सकता है। मगर किसी अपने प्रियजन को खो देना जीवन भर की क्षति होती है। 

दुर्घटना में जब किसी की जान जाती है तो एक पूरा परिवार ख़त्म हो जाता है। सड़क दुर्घटनाओं में चोटिल हुए अधिकतर लोग अपने घर के एकमात्र कमाने वाले होते है।

जान बच जाने पर भी कभी-कभी दिमाग़ में इतनी चोट लग जाती है जो आगे के सारे जीवन को अपाहिज कर देती है।

 

हमारा दिमाग बहुत मुलायम होता है इसीलिए यह सिर की हड्डी के अंदर सुरक्षित रहता है। किसी ठोस सतह पर सिर टकराने से सिर की हड्डी टूट सकती है तथा अंदर दिमाग को बहुत अधिक नुक़सान हो सकता है।

हमारा दिमाग बहुत ही नाज़ुक होने के साथ ही हमारे शरीर के सभी कामकाज के लिए सबसे ज़रूरी अंग है। दिमाग में चोट लगने से पैरालिसिस ( पक्षाघात ) तथा कोमा जेसी स्तिथि बन सकती है।

 

एक न्यूरोसर्जन होने के कारण मैं रोज ऐसे कई मरीज देखता हूँ , जो सिर्फ हेलमेट न पहनने की वजह से अपनी जान गँवा देते हैं। दुर्भाग्य से इनमे ज्यादातर लोग जवान और कम उम्र के लड़के होते हैं। । परिवार इलाज के लिए क़र्ज़ में डूब जाते है।

ये सब बहुत दुखद है मगर उससे भी ज्यादा दुखद ये है की इनमे से बहुत सी चोट सिर्फ़ ज़रा सी सावधानी से टाली जा सकती थी। जब वही परिवार अपने लोगों की ऐसी हालत देखते है तो पछताने के अलावा कोई और विकल्प नहीं रहता।

अगर समाज एवं देश की नज़र से भी देखा जाए तो दुर्घटना में जाने वाले अधिकतर लोग काम काज करने वाले वर्ग के होते है और यह उस जनशक्ति का एक हिस्सा है जो हम्मारे समाज की प्रगति के लिए अत्यंत ज़रूरी वर्ग है।

 

  • ये सच है कि हेलमेट से कोई अमर नहीं होता मगर जितना अधिक बचाव किया जा सकता है वो करना चाहिए।

  • चोट घर के पास भी लग सकती है इसलिए हमेशा हेलमेट का प्रयोग करें।

  • हर व्यक्ति की तरह महिलाओं और बच्चों का दिमाग भी नाजुक होता है और उन्हें भी सिर में भारी चोट लग सकती है, इसलिए सभी को हेलमेट जरूरी है।

  • हेलमेट अपने बचाव के लिए है किसी और वजह के लिए नहीं।

  • सड़कों की हालत अच्छी नहीं है इसलिए हेलमेट और भी ज़्यादा आवश्यक है।

  • बाइक या किसी भी दोपहिया पर पीछे बैठने वाले को भी गम्भीर चोट लग सकती है इसलिए उन्हें भी हेलमेट पहनना चाहिए।

 

हम सभी लोग अपने देश में बने क़ानून को तोड़ने के बहाने खोजते है। किसी अन्य देश में जाकर हम सभी कानूनों का पालन चुप चाप करते हैं। हमें अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का दुरुपयोग नहीं करना चाहिए। ये क़ानून समाज के बचाव व भलायी के लिए ही हैं।

 

जब बात जान बचाने के लिए हो रही हो तो हमें लिंग, उम्र, धर्म एवं चालान जैसे बहाने नहीं देखने चाहिए तथा अपने और अपने प्रियजनों के हित को सोचते हुए हेलमेट का उपयोग करना चाहिए।

एक डॉक्टर होने के नाते मैं आप सबसे हाथ जोड़ के विनती करता हूँ की दुपहिया वाहन चलाते समय हमेशा हेलमेट का प्रयोग करें। और यातायात नियमों का पालन करें।

 

लेखक एक न्यूरोसर्जन हैं। और सर्वोदय हॉस्पिटल फरीदाबाद के न्यूरो एवं स्पाइन सर्जरी डिपार्टमेंट के विभागाध्यक्ष हैं। अधिक जानकारी के लिए लिंक पर जाएं Dr. Kamal Verma – Neurosurgeon

 

 

 

 

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